नित्यानन्द चालीसा के नित्यगान से सर्व इच्छा-पूर्ति और विघ्न-नाश

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● महायोगी नित्यानन्द द्वादश नाम

नित्यानन्दो अवधूतेन्दुर
वसुधा-प्राण-वल्लभः ।
जाह्नवी-जीवित-पतिः
प्रेम-धन-प्रदः प्रभु ॥१॥
पद्मावती-सुतः श्रीमान
शची-नन्दन-पूर्वजः ।
भावोन्मत्तो जगत-त्राता
रक्त-गौर-कलेवरः ॥२॥

● महायोगी नित्यानन्द चालीसा

जय महायोगी श्री नित्यानन्द ।
वन्दौं चरण सरोज अखण्ड ॥१॥
चमत्कारी इच्छा-दाता
रोगहर प्रेम-सुख के दाता ॥२॥
पद्मा हाड़ाइ नयनन तारे ।
एकचक्रा धाम पधारे ॥३॥
जयति जाह्नवा-वसुधा-नायक ।
प्रियतम प्राणपति सुखदायक ॥४॥

वीरचन्द्र प्रभु जनक सुखारे ।
करुणारूप गंगा विस्तारे ॥५॥
श्री संकर्षण त्रिभुवन भर्ता ।
उत्पत्ति पालन संहर्ता ॥६॥
कारण गर्भ पयोनिधि स्वामी ।
घट घट के प्रभु अन्तरयामी ॥७॥
धरणीधर प्रभु शेष-अनन्ता ।
श्रीगुरु, भक्ति, भक्त, भगवन्ता ॥८॥

रोषरहित परमानन्द रूपा ।
सदा सत्य वरदान-स्वरूपा ॥९॥
अरुण तरुण तनु सुवर्ण आभा ।
गति गयन्द दृग जीवन लाभा ॥१०॥
नील वसन भूषित हलधारी ।
कुण्डल एक कान सुखकारी ॥११॥
मुक्तामाल जाल उर धारी ।
नूपुर दुःख-भञ्जन रवकारी ॥१२॥
कलि पावन अवतारी गोसाईं ।
प्रेमयोग चरित मुनि गाई ॥१३॥
जिसने शरण तुम्हारी पायी ।
उसकी तो तकदीर बन आयी ॥१४॥
धन-सुख-प्रद महाप्रेम-धनी।
परम-दानी अवधूत शिरोमणि ॥१५॥
छत्र वसन आसन धरि रूपा ।
निशिदिन सेवत प्रेम स्वरूपा ॥१६॥
उज्ज्वल प्रेम रसिक सुखदाता ।
रसावेश धन-राशि विधाता ॥१७॥
रसमय रसभुक् रस के धामा ।
रसिक-वन्द्य रसराज ललामा ॥१८॥
तुम अनाथ के नाथ गोसाई ।
दुःखियों के सदा सहाई ॥१९॥
कीर्तन तेरा करत जो कोई ।
दुःख छूटत परम सुख होई ॥२०॥
कृपासिन्धु पुनि भक्त-अधीना ।
कृपापात्र कीन्हें खल दीना ॥२१॥
दुःखियों को कंठ लगाई ।
पुलक कम्प दृग अश्रु बहाई ॥२२॥
दीर्घ श्वास निःश्वास हुंकारा ।
करुणा-भाव प्रकाश अपारा ॥२३॥
ॐ नमः नित्यानन्दाय ।
यह मन्त्र रोग दूर भगाय ॥२४॥
धन-सुख-लक्ष्मी के बँटवारे ।
भ्रमत नयन निरवधि रतनारे ॥२५॥
वायुलेखन धन-दानकारी ।
इच्छा-पूर्ति के भण्डारी ॥२६॥
नित्यानन्द तुम भक्त सहारे ।
भक्त जनो के प्रण रखवारे ॥२७॥
भक्तों पर संकट जब आते ।
उनको तुम हो तुरन्त बचाते ॥२८॥
जगा-मधा सर किये प्रहारा ।
टप-टप बहे खून की धारा ॥२९॥
करुणा कर दुःख दूर भगाये ।
निज घातक निज गले लगाये ॥३०॥
रोग नाशे जग समृद्ध कीन्हें ।
सुर दुर्लभ इच्छामृत दीने ॥३१॥
ऐसो कौन उदार जग माहीं ।
इच्छादान दे सब जन काहीं ॥३२॥
कलियुग पीड़ित जीव बिचारे ।
गिन-गिन टेर-टेर सब तारे ॥३३॥
निर्बल-बन्धु दीन-उद्धारी ।
दरिद्र-भञ्जन कष्ट-संहारी ॥३४॥
विधि निषेध तुच्छहिं करि डारे ।
रिश्तों में प्रीति विस्तारे ॥३५॥
धन-दाता तुम हो दुःख-हारी ।
प्रेम-जीवन-धन प्रेम-प्रचारी ॥३६॥
नित्यानन्द तुम सत्य सनातन ।
तेरा कीर्तन मेरा प्राणधन ॥३७॥
नित्यानन्द नमामि नमामि ।
मो सम कौन प्रार्थी पथगामी ॥३८॥
यह प्रेम चालीसा जो नित गावे ।
सर्व मनोरथ सिद्ध हो जावे ॥३९॥
धन सुख शान्ति नित घर आवे ।
सब कष्टों से मुक्ति पावे ॥४०॥

● महायोगी नित्यानन्द आरती

आरती प्रभु श्री नित्यानन्द की ।
जाह्नवा-वसुधा के प्राणपति की ॥
सब दुःखी जीवों के भैया ।
बलिहारी पद्मावती मैया ।
हाड़ाइसुत आनन्द-कन्द की ।
आरती प्रभु श्री नित्यानन्द की ॥१॥
मणिमय मुकुट शीश मन मोहे ।
एक कान कुण्डल अति सोहे ।
इन्दु विनिन्दित छवि मुखचन्द की ।
आरती प्रभु श्री नित्यानन्द की ॥२॥
गल मणिमाल जालकी हलकन ।
नील वसन अद्भुत शोभा तन ।
मनहर छवि मुस्कान मन्द की ।
आरती प्रभु श्री नित्यानन्द की ॥३॥
घूर्णित नयन श्वेत रतनारे ।
भुजा उठाये प्रेम मतवारे ।
काटत कठिन पाश कर्म-फन्द की ।
आरती प्रभु श्री नित्यानन्द की ॥४॥
“इच्छा माँगो” टेरत प्रति द्वारे ।
कीर्तन कराय दुःखी बहु तारे ।
एक ही गति सब दुःखियों की ।
आरती प्रभु श्री नित्यानन्द की ॥५॥

● इच्छा-पूरक नित्यानन्द महायोग

इच्छा-पूर्ति और दुःख-हरण के ४ उपाय:

१) “निताइ” मन्त्र का वायुलेखन

२) “ॐ नमः नित्यानन्दाय” का कीर्तन

३) प्रेमयोग और चालीसा का गायन

४) अवधूतजी से नित्यानन्द लीला श्रवण

● वायुलेखन की प्रक्रिया

Nityaanand Mahayogi Vayulekhan

हथेली से हवा में अपनी आँखों के सामने बड़े आकार में नित्यानन्द महायोगी के छोटे मन्त्र “निताइ” के १० अक्षरों को ऊपर दिखाए गए अनुक्रम में लिखें। 
लिखते समय प्रति अक्षर में नित्यानन्द महायोगी के दिव्य रूप का ध्यान nityaanand.com के अनुसार करें।

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4 Comments on “नित्यानन्द चालीसा के नित्यगान से सर्व इच्छा-पूर्ति और विघ्न-नाश”

  1. This enhanced version is imbued with positivity, faith, hope for material and spiritual aspirants, by your blessings it’s sure to bless with all that is desired. Joy Nityaanand Chalisa! Thank you so much Nityaanand Yogi.

    1. सच कहा आपने। नित्यानन्द चालीसा गाने से हमारे जीवन में एक नयी आशा और समृद्धि बनती है, जो हमारे सारे दुखों को दूर कर देती है।

  2. First time when I sung the above Nityaanand Arti with you, my agitated mind calmed down immediately after that. Its full of positive potency.